फकीर मोहन साहित्य परिषद के तत्वावधान में बासंती दास की दो पुस्तकें हुईं लोकार्पित
बालासोर, 29 दिसंबर (कृष्ण कुमार महांति):
कवितीर्थ शांतिनिकेतन में फकीर मोहन साहित्य परिषद एवं रेमुना साहित्य संसद के संयुक्त सहयोग से लेखिका बासंती दास की दो पुस्तकों का लोकार्पण समारोह आयोजित किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता फकीर मोहन साहित्य परिषद के अध्यक्ष डॉ. सुबास चंद्र पात्र ने की।
इस अवसर पर पूर्व नीलगिरि विधायक कॉमरेड प्रदीप्त पांडा मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे और उन्होंने दोनों पुस्तकों का औपचारिक विमोचन किया। अपने संबोधन में उन्होंने फकीर मोहन साहित्य परिषद और रेमुना साहित्य संसद को ओडिशा की दो समर्पित साहित्यिक संस्थाएँ बताते हुए फकीर मोहन साहित्य परिषद को “साहित्य का वैकुंठ” कहा।
अध्यक्षीय वक्तव्य में डॉ. सुबास चंद्र पात्र ने उपन्यास विधा के विकास पर प्रकाश डालते हुए कहा कि कभी आधुनिक उपन्यास को कुछ आलोचकों ने साहित्य की “अवैध संतान” कहा था, किंतु आज उपन्यास साहित्य ने व्यापक पाठकीय स्वीकृति प्राप्त कर ली है और यह एक लोकप्रिय साहित्यिक विधा के रूप में स्थापित हो चुका है।
प्रख्यात समालोचक पंडित निरंजन साहू ने काव्य-संग्रह ‘माटी का स्वर’ की समीक्षा करते हुए इसकी तुलना धरती माता से की। उन्होंने कहा कि जैसे मिट्टी सभी को समान रूप से पोषण देती है, उसी प्रकार कवयित्री बासंती दास ने प्रत्येक कविता को समान संवेदना और गरिमा के साथ प्रस्तुत किया है।
संपादक डॉ. रत्नाकर सिंह ने भूमिका रखते हुए उपन्यास ‘घासफूल’ की समीक्षा की। उन्होंने कहा कि यह उपन्यास इस भाव को उजागर करता है कि निष्ठापूर्ण कर्म का फल भले ही देर से मिले, किंतु धैर्य रखने पर उसका परिणाम मधुर और सुखद होता है।
दोनों पुस्तकों के प्रकाशक स्वाती प्रकाशन की ओर से प्रकाशकीय अनुभव साझा किए गए, वहीं लेखिका बासंती दास ने अपने लेखकीय अनुभव और सृजनात्मक यात्रा के बारे में विचार व्यक्त किए।
कार्यक्रम में संयुक्त सचिव राजेश गिरी ने अतिथियों को मंच पर आमंत्रित किया, जबकि संयुक्त सचिव कल्याणी नंद ने धन्यवाद ज्ञापन किया। इस अवसर पर लेखिका के पति गोविंद दास, परिवार के अन्य सदस्य तथा बड़ी संख्या में साहित्यकार, बुद्धिजीवी और साहित्यप्रेमी उपस्थित रहे। इनमें प्रशांत बराल, नरोत्तम परिडा, विजय महाकुड़, प्रदीप मिश्र, चक्रधर दास, प्रभाकर साहू, अरुणा राय, अंजलि पांडा, बासंती डे, ज्योत्स्ना राय, जयश्री मिश्र, दीनबंधु लेंका, तपन राय, शरत चंद्र महापात्र, शिरीष चंद्र जेना, कालिकिंकर दास, विद्याधर साहू, पद्मलोचन प्रधान, मधुसूदन माझी, हरेकृष्ण पल्लेई सहित अनेक गणमान्य उपस्थित थे।