चांदीपुर स्थित ऐतिहासिक पीएक्सई प्रयोगशाला में अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर ‘सुष्री’ कार्यक्रम आयोजित
बालासोर, 9 मार्च (कृष्ण कुमार मोहंती): रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) ने अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर 9 मार्च को प्रूफ एंड एक्सपेरिमेंटल एस्टैब्लिशमेंट (पीएक्सई), चांदीपुर में ‘सुष्री’ कार्यक्रम का आयोजन किया। यह प्रयोगशाला डीआरडीओ की सबसे पुरानी प्रयोगशालाओं में से एक है।
कार्यक्रम का उद्घाटन डॉ. समीर वी. कामत, सेक्रेटरी, डिफेन्स रिसर्च एंड डेवलपमेंट, तथा अनु गर्ग, चीफ सेक्रेटरी, ओडिशा सरकार द्वारा किया गया।
इस अवसर पर प्रो. गीतांजलि दाश, वाइस-चांसलर, बरहामपुर विश्वविद्यालय; प्रो. (डॉ.) प्रतीक किशोर, डायरेक्टर जनरल, आर्मामेंट एंड कॉम्बैट इंजीनियरिंग क्लस्टर; डॉ. के. राजलक्ष्मी मेनन, डायरेक्टर जनरल (एरोनॉटिकल सिस्टम्स); तथा सुबोध कुमार नायक, डायरेक्टर, पीएक्सई सहित विभिन्न टेक्नोलॉजी क्लस्टरों के डायरेक्टर जनरल, प्रयोगशालाओं के डायरेक्टर और देशभर से आईं अनेक प्रतिष्ठित महिला वैज्ञानिक एवं शोधकर्ता उपस्थित थीं।
कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य डीआरडीओ में विभिन्न स्तरों पर कार्यरत महिलाओं के लिए वैज्ञानिक उन्नयन और शोध के अवसरों को और सुदृढ़ बनाना था।
इस अवसर पर बोलते हुए डॉ. समीर वी. कामत ने कहा कि विज्ञान और इंजीनियरिंग के क्षेत्र में महिलाओं को अपनी पूरी क्षमता विकसित करने के लिए अनुकूल वातावरण प्रदान करना अत्यंत आवश्यक है।
चीफ सेक्रेटरी अनु गर्ग ने डीआरडीओ की महिला वैज्ञानिकों की भूमिका की सराहना करते हुए कहा कि उनका कार्य राष्ट्रीय सुरक्षा और रक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है।
डॉ. के. राजलक्ष्मी मेनन ने महिला वैज्ञानिकों और तकनीकी अधिकारियों के समर्पण तथा उपलब्धियों की प्रशंसा करते हुए वैज्ञानिक और तकनीकी क्षेत्रों में उनके बहुमूल्य योगदान को रेखांकित किया। प्रो. (डॉ.) प्रतीक किशोर ने भी डीआरडीओ में कार्यरत महिला पेशेवरों के उत्कृष्ट योगदान की सराहना की और एक समावेशी, सम्मानजनक तथा सशक्त कार्य वातावरण बनाने की प्रतिबद्धता दोहराई, जहां महिलाएं सीख सकें, नेतृत्व कर सकें और उत्कृष्टता प्राप्त कर सकें।
अपने संबोधन में पीएक्सई के डायरेक्टर सुबोध कुमार नायक ने राष्ट्रीय रक्षा को सुदृढ़ बनाने में इस प्रयोगशाला की महत्वपूर्ण भूमिका पर प्रकाश डाला और यहां कार्यरत महिला शोधकर्ताओं के योगदान की सराहना की।
वर्ष 1895 में स्थापित प्रूफ एंड एक्सपेरिमेंटल एस्टैब्लिशमेंट वर्ष 1958 में डीआरडीओ का हिस्सा बना। यह प्रयोगशाला सशस्त्र बलों द्वारा उपयोग में लाए जा रहे अथवा विकासाधीन सैन्य तोपों, गोला-बारूद और आयुधों के परीक्षण तथा प्रायोगिक जांच के लिए जिम्मेदार है।