राधाश्याम राउल की व्यंग्य कथा-पुस्तक ‘आपनंकर बिश्वस्त’ का लोकार्पण : व्यंग्य साहित्य का आवेदन अनूठा, महिमा अतुलनीय: अतिथि ने कहा

Mar 9, 2026 - 01:29
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राधाश्याम राउल की व्यंग्य कथा-पुस्तक ‘आपनंकर बिश्वस्त’ का लोकार्पण : व्यंग्य साहित्य का आवेदन अनूठा, महिमा अतुलनीय: अतिथि ने कहा

बालेश्वर, 8 मार्च (कृष्ण कुमार महान्ति): प्रख्यात व्यंग्यकार और स्तंभकार राधाश्याम राउल की पुस्तक ‘आपनंकर बिश्वस्त’, जिसका प्रकाशन ‘स्वाबलम्बन’ प्रकाशन संस्था द्वारा किया गया है, का विधिवत लोकार्पण कल सायंकाल कटक स्थित श्रीरामचन्द्र भवन में आयोजित एक समारोह में किया गया।

कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रख्यात साहित्यकार तथा ‘कलाविकाश केन्द्र’ के अध्यक्ष डॉ. विजयआनन्द सिंह ने की।

मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित वरिष्ठ पत्रकार डॉ. राजाराम शतपथी ने कहा कि समस्याओं, उलझनों और असहायता से घिरे जीवन में यदि मनुष्य कुछ क्षण हँसी और आनंद के संजो सके, तो इससे बड़ी उपलब्धि शायद ही कोई हो। उन्होंने कहा कि व्यंग्य साहित्य मनुष्य को स्वस्थ, ताजगीपूर्ण और चिंतामुक्त बनाए रखने की एक प्रभावी औषधि है। इसलिए व्यंग्य साहित्य का आवेदन अनूठा और उसकी महिमा अतुलनीय है।

सम्मानित अतिथि के रूप में उपस्थित प्रख्यात साहित्यकार तथा ‘उत्कल साहित्य समाज’ के अध्यक्ष डॉ. गोविन्द चन्द्र चांद ने पुस्तक के शीर्षक की सार्थकता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि राधाश्याम राउल स्वयं व्यंग्य साहित्य के एक सच्चे और विश्वस्त साधक हैं।

मुख्य वक्ता के रूप में प्रख्यात साहित्यकार तथा रेवेंसॉ विश्वविद्यालय के ओड़िया विभाग के प्राध्यापक डॉ. ज्ञानी देवाशीष मिश्र ने समकालीन व्यंग्य साहित्य की धाराओं और प्रवृत्तियों पर प्रकाश डालते हुए राउल की व्यंग्य शैली की चर्चा की। उन्होंने कहा कि व्यंग्य एक शुद्ध और गरिमामय लेखन है, जो सहानुभूति, स्वाभिमान और संवेदनशीलता का प्रतीक है।

व्यंग्य साहित्य के युवा शोधकर्ता और ओड़िया प्राध्यापक डॉ. निरोद कुमार मंत्री ने पुस्तक की विस्तृत समीक्षा करते हुए इसे एक सफल और उल्लेखनीय व्यंग्य कथा-संग्रह बताया।
अध्यक्षीय वक्तव्य में डॉ. विजयआनन्द सिंह ने कहा कि व्यंग्य साहित्य एक गंभीर साधना है, जो उच्च विचार और तीक्ष्ण बौद्धिक दृष्टि से संचालित होती है। यह एक संयमित और सजग साहित्यिक कला है, जो समाज तक सार्थक संदेश पहुँचाती है।

कवयित्री विश्वमित्रा मिश्र ने अतिथियों को मंच पर आमंत्रित किया। साहित्यकार सरोज कुमार सामल ने अतिथियों का परिचय दिया, जबकि पुस्तक के प्रकाशक संतोष कुमार बारिक ने धन्यवाद ज्ञापन किया।

इस अवसर पर डॉ. नारायण चन्द्र महान्ति, नवकिशोर दास, सज्जन शर्मा, ज्ञान होता, शरत कुमार नायक, बिपिन बिहारी राउत, डॉ. किशोर चन्द्र महान्ति, रबिनारायण दास, शशिकांत राउत, अरविन्द राउतराय, प्रो. आदित्य प्रसाद धल, इंजि. सौरांशु पटनायक, ओम अभिज्ञान साहू, शिवाशिष कर, सुस्मिता रथ, डॉ. बैजयन्ती मिश्र, स्मृति पटनायक, बबिता दास महापात्र, कृष्णचन्द्र पंडा, सरोजिनी मिश्र, विजयलक्ष्मी नायक, नमिता महान्ति, अरुण अग्रवाल, अदैत्या नायक, अनुपमा नंदा, हर्षमणि नायक, जयशंकर महाराणा, देवज्योति दास, शरत चन्द्र महान्ति, नागेन्द्र प्रसाद महापात्र, विश्वजीत दास, तपन कुमार जेना, मानस रंजन पटनायक, सारदा प्रसाद षडंगी, सुरथ कुमार गाइगारिया, संजय कुमार देओ, नारायण साहू, सुषान्त कुमार साहू, दोलगोविन्द बेहरा, उमाकान्त पुजारी, मणि साहू सहित अनेक गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।