सर्जक के भीतर सृजन की अनंत संभावनाएँ निहित होती हैं : ‘अनुराग’ साहित्यिक विमर्श का आयोजन

Mar 9, 2026 - 01:31
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सर्जक के भीतर सृजन की अनंत संभावनाएँ निहित होती हैं : ‘अनुराग’ साहित्यिक विमर्श का आयोजन

बालेश्वर, 8 मार्च (कृष्ण कुमार मोहंती): महाविद्यालय के विद्यार्थियों में ओड़िया साहित्य के प्रति रुचि और अनुराग उत्पन्न करने के उद्देश्य से ‘प्रजापति’ साहित्य शाखा की ओर से ‘अनुराग’ शीर्षक से एक साहित्यिक विमर्श का आयोजन बाग वृंदावन स्थित श्री शिक्षा हॉल में किया गया।

कार्यक्रम का उद्घाटन ओड़िया के सुप्रसिद्ध कवि एवं कथाकार गंगाधर बिश्वाल ने किया। इस अवसर पर छात्र-छात्राओं के साथ साहित्यप्रेमी और पाठक भी उपस्थित रहे तथा विमर्श में सक्रिय रूप से भाग लिया।

अपने उद्घाटन वक्तव्य में बिश्वाल ने कहा कि प्रत्येक सर्जक के भीतर सृजन की अनंत संभावनाएँ छिपी रहती हैं। उन्होंने कहा कि एक लेखक को लेखन के समय अपने भीतर की इन संभावनाओं को खोजकर उन्हें सृजन में रूपांतरित करना चाहिए।
इस विमर्श में छात्र प्रतिभागियों के रूप में फकीरमोहन स्वायत्त महाविद्यालय के स्नातकोत्तर छात्र सागर मलिक तथा छात्राएँ बबिता स्वाईं और लोपामुद्रा दास ने भाग लिया। उन्होंने साहित्य के विभिन्न पक्षों पर अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि कविता अपनी सरलता और सहजता के कारण पाठकों को गहराई से प्रभावित करती है।

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए कवि तथा ‘प्रजापति’ के संस्थापक प्रशांत दास ने कहा कि छात्रों में भाषा और साहित्य के प्रति सम्मान और अनुराग पैदा करने के लिए ‘प्रजापति’ समय-समय पर ऐसे कार्यक्रम आयोजित करता है और ‘अनुराग’ उसी प्रयास का एक हिस्सा है।
इस अवसर पर कवयित्रियाँ गायत्री आचार्य और शुभश्री दाश ने भी अपने विचार व्यक्त किए तथा अपनी स्वलिखित कविताओं का पाठ किया।

कार्यक्रम के प्रारंभ में ‘प्रजापति’ के आह्वायक बिप्लब दास महापात्र ने स्वागत भाषण देते हुए ‘अनुराग’ की अवधारणा प्रस्तुत की।
कार्यक्रम के संयोजक कवि मधुसूदन मिश्र ने कवि और कविता पर अपने विचार रखते हुए अपनी एक कविता का पाठ भी किया।
‘प्रजापति’ की सदस्य सरस्वती भोई ने अतिथियों और वक्ताओं को सम्मानित किया, जबकि प्रतिमा त्रिपाठी ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया।

अमरजीत दास, संतोष दलेई और सुकुमार घोष ने कार्यक्रम के संचालन में सहयोग दिया।
अध्यक्ष प्रशांत दास ने बताया कि विद्यार्थियों को लेकर ‘अनुराग’ साहित्यिक कार्यक्रम श्री शिक्षा कक्ष में प्रत्येक दो महीने में एक बार आयोजित किया जाएगा।