कवि सीताकांत महापात्र अपनी कविता में मिथक का अनोखे ढंग से प्रयोग करते हैं: अतिथि

•• 'भल कवितार खोज' (BKK) द्वारा ‘सीताकांत काव्य संध्या’ का आयोजन

Jan 26, 2026 - 00:36
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कवि सीताकांत महापात्र अपनी कविता में मिथक का अनोखे ढंग से प्रयोग करते हैं: अतिथि

बालेश्वर, 25 जनवरी (कृष्ण कुमार महांती): प्रसिद्ध कवि सीताकांत महापात्र की कृतियों पर केंद्रित एक काव्य संध्या का आयोजन शनिवार की संध्या स्थानीय एसीपीएल सम्मेलन कक्ष में 'भल कवितार खोज' (BKK) के 81वें सत्र के अंतर्गत किया गया।

‘सीताकांत काव्य संध्या’ शीर्षक से आयोजित इस कार्यक्रम की अध्यक्षता 'भल कवितार खोज' के संयोजक कवि कृष्ण कुमार महांती ने की। विख्यात कवि एवं समालोचक डॉ. गौतम जेना ने मुख्य अतिथि के रूप में कार्यक्रम में सहभागिता की।

अपने संबोधन में डॉ. जेना ने कहा कि सीताकांत महापात्र की कविता में मिथक का प्रयोग अनोखा और अत्यंत अर्थपूर्ण है। उन्होंने कहा कि सीताकांत की अधिकांश कविताएं प्रेरणादायी हैं और पाठक के मन पर गहरी छाप छोड़ती हैं। कविता का विश्लेषण करते हुए उन्होंने बिंब और प्रतीकों के प्रयोग पर प्रकाश डाला तथा बताया कि मिथक किस प्रकार उनकी कविताओं की गहराई को समृद्ध करता है।

डॉ. जेना ने सीताकांत महापात्र की कविता को तीन चरणों में विभाजित करते हुए जीवन की पीड़ा और संघर्ष, जीवन-बोध की खोज तथा जीवन को एक उच्च, लगभग अमर दृष्टि की ओर ले जाने वाली कविताओं पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने सीताकांत महापात्र को भारतीय संस्कृति और परंपरा से गहराई से जुड़ा हुआ कवि बताया।

इस अवसर पर उपस्थित अन्य साहित्यकारों में कवि श्रीदेव, कथाकार एवं कवि गंगाधर बिस्वाल, कवि उत्पल महांती, डॉ. संतोष कुमार नायक, डॉ. सुभाष चंद्र पात्र, कवि अभय दास, कवयित्री एवं कथाकार देबजानी दास, कवि प्रतीची नंद, अनुवादिका दीपिका सेनापति, मानसी जेना, डॉ. महेश्वर पाढ़ी, डॉ. सारंगधर त्रिपाठी, कवयित्री प्रीतिलेखा दास, कवि कमलिनी कस्ता सहित अनेक साहित्यप्रेमी उपस्थित थे।

एक अन्य प्रमुख वक्ता के रूप में डॉ. संतोष कुमार नायक ने कहा कि सीताकांत महापात्र की कविता में मिथक और आर्किटाइप का अत्यंत प्रभावशाली समन्वय देखने को मिलता है।

कार्यक्रम में सीताकांत महापात्र की चयनित कविताएं का पाठ प्रतीची नंद, दीपिका सेनापति, कमलिनी कस्ता, सारंगधर त्रिपाठी, देबजानी दास और प्रीतिलेखा दास द्वारा किया गया।

इस अवसर पर कवि श्रीदेव ने सीताकांत महापात्र का एक साक्षात्कार पढ़कर सुनाया, जिससे कवि के रचनात्मक व्यक्तित्व पर प्रकाश पड़ा। कार्यक्रम का समापन कवि उत्पल महांती के धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ।