बालासोर में पुस्तक मेले को लेकर विधायक सुबासिनी जेना ने विधानसभा में उठाया प्रश्न

• लेखकों ने प्रशासनिक जवाब पर नई जांच की मांग की

Feb 22, 2026 - 00:09
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बालासोर में पुस्तक मेले को लेकर विधायक सुबासिनी जेना ने विधानसभा में उठाया प्रश्न

बालासोर, 21/2 (कृष्ण कुमार मोहंती): बालासोर में एक पूर्ण विकसित वार्षिक पुस्तक मेले की मांग उस समय और तेज हो गई जब विधायक सुबासिनी जेना ने राज्य विधानसभा में इस विषय पर सरकार की योजना को लेकर प्रश्न उठाया।

बालासोर की ओड़िया भाषा आंदोलन में ऐतिहासिक भूमिका और समृद्ध साहित्यिक परंपरा का उल्लेख करते हुए विधायक ने पूछा कि क्या सरकारी सहयोग से वार्षिक पुस्तक मेला आयोजित करने के लिए कोई ठोस प्रस्ताव तैयार किया गया है।
उत्तर में संबंधित मंत्री ने बताया कि विभाग द्वारा जिला प्रशासन के माध्यम से प्राप्त प्रस्तावों के आधार पर पुस्तक मेलों के आयोजन हेतु आर्थिक सहायता प्रदान की जाती है।

हालांकि कई प्रमुख लेखकों और बुद्धिजीवियों ने इस जवाब पर असंतोष व्यक्त किया है। उनका कहना है कि बालासोर में अभी तक प्रशासनिक संरक्षण में कोई स्वतंत्र और व्यापक पुस्तक मेला आयोजित नहीं किया गया है।

उन्होंने बताया कि हाल ही में पुलिस लाइन मैदान में आयोजित जिला स्तरीय मेले में मुख्य रूप से वस्त्र, खाद्य सामग्री, हस्तशिल्प और अन्य व्यावसायिक उत्पादों का प्रदर्शन किया गया था, जबकि पुस्तकों के लिए केवल एक स्टॉल रखा गया था। उनके अनुसार इसे पूर्ण पुस्तक मेला नहीं माना जा सकता।

उदय नारायण दास, डॉ. राधा रंजन पटनायक, कृष्ण कुमार मोहंती सहित अनेक साहित्यकारों ने इस मामले में प्रशासनिक स्तर पर नई और पारदर्शी जांच की मांग की है। उन्होंने संस्कृति विभाग से इस विषय की गंभीरता से समीक्षा करने और बालासोर की साहित्यिक गरिमा के अनुरूप एक सुव्यवस्थित वार्षिक पुस्तक मेले की व्यवस्था सुनिश्चित करने का आग्रह किया है।

लेखकों ने कहा कि यह मुद्दा जिले की सांस्कृतिक अस्मिता से जुड़ा है और ओड़िया भाषा तथा साहित्य के संवर्धन के लिए सामूहिक प्रयास आवश्यक हैं।