चंद्रभागा संस्थान का वार्षिक उत्सव ‘चंद्रभागोत्सव’ संपन्न: कला, साहित्य और संस्कृति की नई जागृति
बालासोर, 5 जनवरी (कृष्ण कुमार महान्ति): चंद्रभागा संस्थान का वार्षिक उत्सव चंद्रभागोत्सव सोमवार, 29 दिसंबर की सुबह अत्यंत उत्साह और गरिमामय वातावरण में आरंभ हुआ।
उत्सव का शुभारंभ कृतिबास पांडा (बापिनाना) के मंत्रोच्चारण तथा दीप्तिशिखा बर्धन के गीता-पाठ से किया गया। नृत्य संस्था नाच के सहयोग से ओडिशा के विभिन्न विद्यालयों से आए छात्र-छात्राओं के लिए अनेक प्रतियोगिताओं का आयोजन हुआ। उद्घाटन संध्या में प्रख्यात ओड़िया लेखक एवं प्रभावशाली वक्ता दाश बेनहुर मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। उनके विचारोत्तेजक और संवेदनशील वक्तव्य ने श्रोताओं पर गहरी छाप छोड़ी।
चंद्रभागा संस्थान की एक दीर्घकालिक परिकल्पना राष्ट्रीय स्तर के बहुभाषी रंगमंच महोत्सव के आयोजन की थी। इसी उद्देश्य को साकार करते हुए प्रसिद्ध रंगकर्मी सफदर हाशमी के मूल हिंदी नाटक हल्ला बोल का बंगला रूपांतरण शांतिनिकेतन, बीरभूम की रंगमंडली द्वारा निर्मल हाजरा के निर्देशन में मंचित किया गया। तीसरी संध्या में झारखंड के जमशेदपुर से आए विख्यात रंगमंच निर्देशक एवं अभिनेता शिवलाल सागर द्वारा लिखित, निर्देशित और अभिनीत हिंदी नाटक टेररिस्ट की प्रेमिका ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।
समापन रात्रि में असीम बसु फाउंडेशन के सौजन्य से अंग्रेज़ी नाटक द स्केलेटन का ओड़िया रूपांतरण कवि-कथाकार शक्ति महान्ति और देबदत्त पति के संयुक्त निर्देशन में मंचित किया गया। इस प्रस्तुति को दर्शकों से भरपूर सराहना मिली।
समापन समारोह की अध्यक्षता पूर्व विधायक प्रदीप्त पांडा ने की। बस्ता की विधायक श्रीमती सुभासिनी जेना मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहीं। सम्मानित अतिथियों में बालासोर के अतिरिक्त जिलाधिकारी सुधाकर नायक, नगर पालिका अध्यक्ष श्रीमती सबिता साहू, सेवानिवृत्त प्राध्यापक शत्रुघ्न मल्लिक तथा सामाजिक कार्यकर्ता गौरांग पाणिग्राही शामिल थे। वक्ताओं ने कला, साहित्य और संस्कृति के क्षेत्र में चंद्रभागा संस्थान की भूमिका की सराहना करते हुए इसे एक नई सामाजिक चेतना का वाहक बताया और संस्थान के संस्थापक कवि श्रीदेव को सामूहिक सहयोग देने का आह्वान किया। साथ ही उन्होंने चेतावनी दी कि यदि युवा पीढ़ी इससे विमुख होती है, तो व्यापक सांस्कृतिक क्षति संभव है।
कार्यक्रम में नाच संस्था की ओर से अरुणांशु पाणिग्राही ने अतिथियों का स्वागत किया। कवि श्रीदेव ने चंद्रभागा की स्थापना से लेकर अब तक की यात्रा, उसकी चुनौतियों, सफलताओं और भविष्य की योजनाओं पर खुलकर अपने विचार रखे। अंत में संस्थान के वरिष्ठ सदस्य प्रोफेसर डॉ. शशिकांत महान्ति ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया।