सोमनाथ हाट में प्राचीन सोमनाथ मंदिर की खोज : 12वां जगतसिंहपुर हेरिटेज वॉक

Jan 7, 2026 - 00:19
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सोमनाथ हाट में प्राचीन सोमनाथ मंदिर की खोज : 12वां जगतसिंहपुर हेरिटेज वॉक

बालासोर, 4 जनवरी (कृष्ण कुमार मोहंती): रविवार को सोमनाथ हाट स्थित ऐतिहासिक मुचुकुंद सोमनाथ मंदिर में 12वां जगतसिंहपुर हेरिटेज वॉक सफलतापूर्वक आयोजित किया गया। इस आयोजन में बड़ी संख्या में विरासत प्रेमियों ने भाग लिया और मंदिर की ऐतिहासिक व स्थापत्य विरासत को नज़दीक से देखा।
इस हेरिटेज वॉक के दौरान प्रतिभागियों को ऐसे स्थल से रूबरू होने का अवसर मिला, जहां मराठा कालीन स्थापत्य और उससे भी पुराने सोमवंशी काल के अवशेषों का दुर्लभ संगम देखने को मिलता है। लगभग 30 फीट ऊंचा यह मंदिर पत्थर से निर्मित पीढ़ा शैली में बना है। माना जाता है कि मंदिर का मुख्य ढांचा मुगलोत्तर मराठा शासनकाल का है, किंतु वॉक में शामिल विशेषज्ञों के अनुसार मंदिर में स्थापित कई मूर्तियां इससे कहीं अधिक प्राचीन हैं।
भगवान गणेश, कार्तिकेय और देवी पार्वती की मूर्तियां, जिनमें विशिष्ट मुकुट शिल्प और सशक्त शैव प्रतीक दिखाई देते हैं, सोमवंशी वंश से संबंधित मानी जाती हैं। मंदिर परिसर में एक दुर्लभ उमा–महेश्वर प्रतिमा और भगवान विष्णु की एक खंडित मूर्ति भी सुरक्षित है।
यह स्थल गुजरात से आए भक्त मुचुकुंद गोस्वामी से जुड़ी स्थानीय किंवदंती से भी संबंधित है। ऐतिहासिक संदर्भों के अनुसार, वे संत बरंगा और बाउली के समकालीन थे, जिनका उल्लेख आचार्य अच्युतानंद दास की शून्य संहिता में मिलता है। लोककथा के अनुसार, जब मुचुकुंद सरला क्षेत्र की ओर यात्रा कर रहे थे, तब अलका नदी के तट पर शिवलिंग “पातालगामी” हो गया, जिसके फलस्वरूप वर्तमान पीठ की स्थापना हुई।
यह हेरिटेज वॉक सलाहकार प्रभांशु सामंतराय और समन्वयक श्रीकांत सिंह के मार्गदर्शन में आयोजित की गई। कटक, भुवनेश्वर, पुरी और जगतसिंहपुर से आए लगभग 25 प्रतिभागियों ने इसमें भाग लिया। आयोजकों ने कार्यक्रम के सुचारु संचालन में योगदान देने के लिए बिस्वा रंजन देहुरी, उत्कल मोहंती, बसंता मंजरी दास, मंजुलता राउत, भगवान दास, शशांक पांडा, त्रिलोचन स्वाईं, संबित सिंह, देबाशीष पात्र, दिनेश स्वाईं, रतिरंजन पांडा, बिकाश चंद्र स्वाईं, राजेश प्रधान, सौरव सिंह और हृदयानंद बेहेरा के प्रति आभार व्यक्त किया।
वर्तमान में मुचुकुंद सोमनाथ मंदिर इस क्षेत्र का एक प्रमुख आध्यात्मिक केंद्र बना हुआ है, जहां मकर मेला, शिवरात्रि और संक्रांति जैसे पर्वों पर हजारों श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं।