मनोज दास की  ९३वीं जयंती फकीर मोहन साहित्य परिषद द्वारा गरिमापूर्ण ढंग से मनाई गई

Feb 28, 2026 - 23:13
Feb 28, 2026 - 23:14
 8
मनोज दास की  ९३वीं जयंती फकीर मोहन साहित्य परिषद द्वारा गरिमापूर्ण ढंग से मनाई गई

बालेश्वर, २८/२ (कृष्ण कुमार महांति): अविस्मरणीय साहित्यकार एवं पद्मभूषण से सम्मानित मनोज दास की ९३वीं जयंती बालेश्वर स्थित कवितीर्थ शांति कानन में फकीर मोहन साहित्य परिषद के सभागार में श्रद्धा और गरिमा के साथ मनाई गई।

कार्यक्रम की अध्यक्षता परिषद के अध्यक्ष डॉ. सुबाष चंद्र पात्र ने की। मुख्य अतिथि एवं मुख्य वक्ता के रूप में चरम्पा महाविद्यालय, भद्रक के अंग्रेजी विभाग की प्राध्यापिका डॉ. सुकांति महापात्र उपस्थित थीं। 

अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि मनोज दास का साहित्य सभी वर्गों के लिए प्रेरणा का स्रोत है। उनकी रचनाओं में धैर्य, सहानुभूति और मानवीय गरिमा का गहरा संदेश निहित है। उन्होंने उन्हें भारतीय संस्कृति और संस्कारों का प्रखर प्रतिनिधि तथा गहन चिंतक बताया।

उन्होंने कहा कि मनोज दास की सृजनात्मक दृष्टि में प्रकाश और अंधकार, यथार्थ और मायिकता, भौतिक और आध्यात्मिक, इंद्रिय और इंद्रियातीत, लोक और परलोक के बीच कोई कठोर विभाजन नहीं दिखाई देता। उनकी रचनाएँ इन सभी आयामों का समन्वय प्रस्तुत करती हैं, जिसमें मानवीय मूल्यों की सशक्त अभिव्यक्ति मिलती है।
सचिव डॉ. रत्नाकर सिंह ने प्रारंभिक वक्तव्य प्रस्तुत किया। संयुक्त सचिव राजेश कुमार गिरी ने अतिथियों को मंच पर आमंत्रित किया। कार्यक्रम के आरंभ में डॉ. लक्ष्मीकांत त्रिपाठी द्वारा रचित मनोज दास पर आधारित एक गीत का सामूहिक प्रस्तुतीकरण संयुक्त सचिव कल्याणी नंद के संयोजन में किया गया। अंत में कल्याणी नंद ने धन्यवाद ज्ञापन किया।

इस अवसर पर अनेक साहित्यप्रेमी उपस्थित रहे और अपनी सहभागिता से समारोह को सफल बनाया।