भाषा पक्ष्य के छठे दिवस पर ओबीबीए द्वारा कथाकार निवारण जेना के सम्मान में साहित्यिक संध्या आयोजित
बालेश्वर, 28/02 (कृष्ण कुमार महांति): भाषा पक्ष्य के छठे दिवस तथा चल रहे कुटीर पुस्तक मेले के अवसर पर ओडिया भाषा विकास आंदोलन (ओबीबीए) की ओर से प्रख्यात कथाकार निवारण जेना के सम्मान में एक साहित्यिक संध्या का आयोजन किया गया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता डॉ. लक्ष्मीकांत त्रिपाठी ने की।
इस अवसर पर समीक्षक स्मृति दास ने कहा कि अपने पाँच दशकों के साहित्यिक सफर में जेना ने शब्दों का एक सुदृढ़ और प्रभावशाली संसार रचा है, जो ओड़िया कहानी साहित्य की गरिमा को लंबे समय तक बनाए रखेगा। उन्होंने कहा कि समकालीन कथा-संवेदना को आकार देने में उनका योगदान महत्वपूर्ण रहा है।
युवा शोधकर्ता त्रिनाथ नंदी ने जेना की साहित्यिक कृतियों का समग्र अवलोकन प्रस्तुत करते हुए कहा कि उनकी कहानियों की पृष्ठभूमि और पात्र जीवन की वास्तविकता के अत्यंत निकट हैं। उनके अनुसार, जेना की कथा-शक्ति का आधार मानवीय मनोविज्ञान और सामाजिक परिस्थितियों का सत्यनिष्ठ चित्रण है।
एक अन्य युवा समीक्षक रितेश दास ने कहा कि लेखक का व्यक्तिगत व्यवहार और वक्तव्य भले ही सौम्य और संयत हो, किन्तु उनके कथा-पात्रों की आवाज़ गहन और तीव्र है। उन्होंने कहा कि जेना ने अपनी कहानियों की आत्मिक संपदा और अपने अंतर्मन के बीच एक सार्थक सेतु स्थापित किया है।
अपने वक्तव्य में निवारण जेना ने कहा कि उनकी कहानियों और उपन्यासों के कथानक वास्तविक जीवन के अनुभवों से प्रेरित होते हैं। वे अपने आसपास के लोगों के मनोभावों और जीवन स्थितियों से कथानक के सूत्र ग्रहण करते हैं, जिससे उनकी रचनाओं में स्वाभाविकता और प्रामाणिकता आती है।
अध्यक्षीय संबोधन में डॉ. चौधरी सत्यव्रत नंदा ने आयोजन के उद्देश्य पर प्रकाश डालते हुए जेना की कहानियों की तुलना निर्मल और प्रवहमान नदी के जल से की। डॉ. लक्ष्मीकांत त्रिपाठी द्वारा जेना पर लिखी गई कविता का पाठ कल्याणी नंदा ने किया। संयुक्त सचिव जुमरनाथ पात्र ने अतिथियों को मंच पर आमंत्रित किया। दीपक बोस ने जेना की एक कहानी का वाचन किया, जबकि डॉ. सारंगधर त्रिपाठी ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया।