सुवर्णपुर में आयोजित हुआ अठारहवां ‘महुरी महोत्सव’: साहित्य जगत में ‘महुरी’ की भूमिका अनिवार्य, अतिथियों का मत
* डॉ. प्रीतिधारा सामल और डॉ. नृपराज साहू को ‘महुरी सम्मान’ से किया गया सम्मानित
बालेश्वर, 4 जनवरी (कृष्ण कुमार महान्ति): मानव मन की भावनाओं को अभिव्यक्त करने का सबसे सशक्त माध्यम साहित्य है। साहित्य-साधना सुख और दुःख, अभाव और कठिनाइयों में कोई भेद नहीं करती। साहित्य में शब्द, छंद और अलंकार से अधिक भाव का महत्व होता है। जीवन को छूते हुए प्रसंगों को अपने हर पन्ने पर सहेजने वाली महुरी पत्रिका ने आज साहित्य जगत में एक विशिष्ट पहचान बनाई है। कवि, लेखक और साहित्यकारों को समान रूप से अपनाने वाली महुरी ओड़िया साहित्य में एक अनोखी और उल्लेखनीय उपस्थिति बन चुकी है। ये विचार सुवर्णपुर स्थित संस्कृति भवन में आयोजित अठारहवें महुरी महोत्सव के अवसर पर वक्ताओं ने व्यक्त किए।
कालाहांडी कविता आंदोलन की सशक्त आवाज महुरी साहित्य पत्रिका के तत्वावधान में इसका अठारहवां वार्षिक उत्सव सुवर्णपुर में आयोजित किया गया।
महोत्सव की अध्यक्षता महुरी के प्रधान संपादक डॉ. भवानिशंकर नियाल ने की। संबलपुर विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर विधुभूषण मिश्र मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे, जबकि वरिष्ठ लेखक प्रोफेसर नारायण पांडा ने मुख्य वक्तव्य दिया। विशिष्ट अतिथियों में कथाकार एवं सुवर्णपुर के जिलाधिकारी डॉ. नृपराज साहू तथा कवयित्री डॉ. प्रीतिधारा सामल शामिल थीं। महुरी के संपादक एवं कथाकार सुकांत साहू ने स्वागत भाषण दिया और सुशील कुमार ने मंच संचालन किया।
इस अवसर पर डॉ. प्रीतिधारा सामल को महुरी सम्मान–2024 तथा डॉ. नृपराज साहू को महुरी सम्मान–2025 से सम्मानित किया गया।
द्वितीय सत्र में राज्य स्तरीय कविता पाठोत्सव आयोजित हुआ। महानदी साहित्य संसद के अध्यक्ष डॉ. सौरभ रंजन खमारी की अध्यक्षता में आयोजित इस सत्र में सेवानिवृत्त प्राध्यापक डॉ. ज्योतिरंजन बहिदार, उलुंडा स्थित पंचायत समिति महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. देवाशीष पांडिया, शिक्षाविद एवं शोधकर्ता डॉ. अनिरुद्ध कुरकुरिया तथा अध्यापिका डॉ. इतिश्री दास अतिथि के रूप में उपस्थित थे। कवि लक्ष्मी नारायण साहू और रंजिता पांडा ने कविता पाठोत्सव का संयोजन किया, जिसमें राज्य के विभिन्न अंचलों से आए तीस से अधिक कवियों ने अपनी स्वरचित कविताओं का पाठ किया।
इस साहित्यिक समागम में अतिरिक्त जिलाधिकारी राजेंद्र माझी और एंजेलिना प्रधान, जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी डॉ. अश्विनी मेहर, उपजिलाधिकारी डॉ. सौम्यारूपा रथ, जिला पंचायत एवं सूचना एवं लोक संपर्क अधिकारी अर्जुन माझी, जिला संस्कृति अधिकारी जमुना प्रधान, सहायक जिलाधिकारी सत्यव्रत साहू सहित अन्य जिला स्तरीय अधिकारी, बड़ी संख्या में कवि, लेखक, साहित्य प्रेमी तथा मीडिया प्रतिनिधि उपस्थित रहे।