फकीरमोहन साहित्य परिषद द्वारा विश्व मातृभाषा दिवस का आयोजन

• मातृभाषा हृदय की भाषा है, केवल मस्तिष्क की नहीं : वक्ता

Feb 23, 2026 - 23:43
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फकीरमोहन साहित्य परिषद द्वारा विश्व मातृभाषा दिवस का आयोजन

बालेश्वर, 24/2 (कृष्ण कुमार महान्ति): कवितीर्थ शांतिनिकेतन में फकीरमोहन साहित्य परिषद के तत्वावधान में विश्व मातृभाषा दिवस मनाया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता परिषद के अध्यक्ष डॉ. सुबास चन्द्र पात्र ने की।

मुख्य अतिथि के रूप में ओड़िया दैनिक ‘समाज’ के संपादकीय प्रमुख एवं सुप्रसिद्ध साहित्यकार कुलमणि बारिक ने कहा कि मातृभाषा के प्रति प्रेम न रहे तो माँ, मातृभूमि और मानवता के प्रति सच्चा अनुराग संभव नहीं है। उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र, केरल, कर्नाटक और पश्चिम बंगाल की सरकारें अपनी भाषाओं के संरक्षण और संवर्धन के लिए गंभीर प्रयास कर रही हैं, जबकि इस क्षेत्र में ओडिशा सरकार अपेक्षाकृत पीछे है।
कवि दीप्ति दास ने कहा कि भाषा के बिना संसार निर्जीव है। माँ वाग्देवी के आशीर्वाद से ही मानव जीवन में अभिव्यक्ति और आनंद संभव हुआ है। अन्य भाषाएँ जहाँ मस्तिष्क की भाषा हो सकती हैं, वहीं मातृभाषा हृदय की भाषा बनकर रहती है। इस अवसर पर बालेश्वर जिला विद्यालय, फकीरमोहन उच्च माध्यमिक विद्यालय, फकीरमोहन स्वायत्त महाविद्यालय, कुंतला कुमारी साबत महिला महाविद्यालय तथा फकीरमोहन विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों को मातृभाषा के प्रति अपने विचार व्यक्त करने का आह्वान किया गया।

परिषद के सचिव डॉ. रत्नाकर सिंह ने प्रारंभिक वक्तव्य दिया। कल्याणी नंद और उनके साथियों ने भाषा वंदना गीत प्रस्तुत किया। अंत में डॉ. पात्र ने धन्यवाद ज्ञापन करते हुए कहा कि मातृभाषा के प्रति प्रेम से ही राष्ट्रीय गौरव और प्रगति का मार्ग प्रशस्त होता है।

कार्यक्रम में बड़ी संख्या में भाषाप्रेमियों की उपस्थिति ने आयोजन को सफल बनाया।