‘स्रष्टा’ नाट्य संस्था के वार्षिक उत्सव पर राज्यस्तरीय नाट्य महोत्सव आयोजित

* तीसरी संध्या पर मंचित हुआ नाटक ‘साउंता काईं’

Feb 4, 2026 - 21:43
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‘स्रष्टा’ नाट्य संस्था के वार्षिक उत्सव पर राज्यस्तरीय नाट्य महोत्सव आयोजित

बालेश्वर, 4 फरवरी (कृष्ण कुमार मोहन्ती): खिले हुए कुमुद फूलों से भरे तालाब की प्राकृतिक सुंदरता किसे आकर्षित नहीं करती? लेकिन क्या वही तालाब यह जानता है कि एक फूल के पूर्ण रूप से खिलने से पहले उसके गर्भ में असंख्य कलीयाँ नष्ट हो जाती हैं? फिर भी यदि कोई एक कुमुद फूल खिलकर जीवित रह जाए, तो कोई संवेदनशील व्यक्ति उसे कीचड़ से सहेज कर उठा लेता है। लेकिन वह “सहेजा गया कुमुद” कौन है? सहेजे जाने के बाद वह मुरझा जाता है या जीवित रहता है? क्या वह केवल एक फूल है, या कुमुद के समान दिखने वाली कोई सुंदर युवती?

कुमुद फूल किसी के लिए भले ही तुच्छ हो, लेकिन उसके जीवन का अधिकार है। स्त्री को चाहे जितना भी ‘रत्न’ कहा जाए, समाज आज भी उसे कौड़ी के मूल्य पर आंकने से पीछे नहीं हटता। ऐसा क्यों है? क्या इस विकृत मानसिकता के लिए कोई एक व्यक्ति जिम्मेदार है, या इसके मूल में हमारा पुरुष-केंद्रित समाज है?

इन्हीं समकालीन और संवेदनशील सामाजिक प्रश्नों को केंद्र में रखकर रचित नाटक ‘साउंता काईं’ का मंचन कल राज्यस्तरीय नाट्य महोत्सव के अंतर्गत किया गया।

ओड़िया भाषा, साहित्य एवं संस्कृति विभाग के सहयोग से आयोजित ‘स्रष्टा’ नाट्य संस्था के 48वें वार्षिक उत्सव एवं चतुर्थ राज्यस्तरीय नाट्य महोत्सव की तीसरी संध्या गांधी स्मृति भवन में डॉ. प्रफुल्ल चंद्र आचार्य स्मृति संध्या के रूप में आयोजित की गई।
इस अवसर पर सेवानिवृत्त प्राचार्य एवं प्रख्यात नाट्यकार मेजर डॉ. प्रदीप भौमिक मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे, जबकि युवा नेता एवं समाजसेवी बिक्रम पांडा सम्मानित अतिथि के रूप में शामिल हुए। दोनों अतिथियों ने नाटक के विभिन्न पक्षों पर प्रकाश डाला। ‘स्रष्टा’ के सचिव एवं प्रसिद्ध नाट्यकार हेमेन्द्र महापात्र ने समारोह की अध्यक्षता की, जबकि आलोक कुमार साहू ने भूमिका भाषण प्रस्तुत किया। उपाध्यक्ष प्रसन्न कुमार दास ने मंच संचालन किया।

अंत में नाट्यकार पीतांबर दास के समापन वक्तव्य के पश्चात, पंचानन दास द्वारा लिखित एवं सत्यव्रत दास के निर्देशन में ओडिशा नाटक समारोहो समिति, ब्रह्मपुर द्वारा मंचित नाटक ‘साउंता काईं’ ने दर्शकों को गहरी सोच में डूबो दिया।